Susral susral hi kyu ban jata hai apna ghar banane ki koshish kro pher bhi nahi banta

Susral susral hi kyu ban jata hai apna ghar banane ki koshish kro pher bhi nahi banta

रिश्ता अपनों का

“राजीव प्लीज़ जल्दी आ जाओ। मम्मी का कॉल आया था, वो… वो कह रही थी कि पापा को एडमिट करवाया है। तबीयत बहुत खराब है उनकी । हमें अभी ही अस्पताल जाना चाहिये। प्लीज़ छुट्टी ले कर आ जाओ। ”

“चिल सुमि, अस्पताल में डॉक्टर हैं ना वो देख लेंगे और यार अभी तो किसी हालत में छुट्टी नहीं देगा बॉस। याद है ना चार दिन पहले ही दीदी की बेटी के मुंडन के लिए छुट्टी ली थी। सुनो ना शाम में चलेंगे ना, वैसे भी आधा घंटा ही तो लगेगा। ”

अलग समझा मेरे मम्मी पापा को

“पर राजीव.. पापा.. मम्मी वहाँ अकेली.. कैसे वो सब कुछ देखेगी। किस हालात से गुजर रही होगी । ”

“तुम भी बहुत जिद्दी हो यार। एक काम करो, कैब बुक कर लो और चली जाओ। मैं शाम में वहीं आ जाऊँगा और हाँ जाने से पहले माँ पापा का लंच बना कर रख देना, नहीं तो फिर से घर में नाटक होने लगेगा। ”

राजीव की बातों से कहीं भी नहीं लगा कि उन्हे मेरे माँ पापा की ज़रा भी चिंता है । ऐसी हालत में कौन ऐसे मुँह मोड़ता है भला। मैं तो ससुराल में सबका ध्यान रखती , सास ससुर सबकी जिम्मेदारी मुझ पर थी और मैं अपनी जिम्मेदारी पूरी भी करती साथ ही यह भी उम्मीद करती कि राजीव भी मेरे मायके के लिए अपनी जिम्मेदारी का पूर्ण निर्वहन करें पर जैसे जैसे मैं जिम्मेदार बनती गयी वैसे वैसे राजीव गैर जिम्मेदार होने लगे।

मैंने सोच लिया कि मैं तो जाऊँगी ही । मैंने कैब बुक किया और जल्दी जल्दी लंच बनाकर चली गयी । वो डेढ़ घण्टे मुझ पर कैसे बीते ये मेरे सिवाय शायद ही कोई समझ पाये। हर पल पापा का चेहरा दिखता सामने जैसे वो हँस कर मुझे अपने पास बुला रहे हों और साथ ही माँ का रोता चेहरा दिखता जो एक अन्जाने डर का एहसास करा रहा था। घबराते घबराते हिलते कँपकँपाते हाथों से सारे काम निबटा कर मैं माँ के पास जाने निकल गयी। वहाँ जा कर देखा तो पापा खतरे से बाहर थे। बुखार बहुत ज्यादा होने की वजह से उन्हे एडमिट करना पड़ा था । माँ की सूजी आँखे उनकी हालत बयां करने के लिए काफी थी। मुझे देखते ही माँ लिपट गयी मुझसे और बोली – सुमि पापा ठीक हैं अभी । डॉक्टर ने कहा आज यहीं रखेंगे अपनी देख रेख में और कल हम पापा को घर ले जा सकेंगे।

माँ सब ठीक हो जायेगा, आप टेंशन ना लो। सुबह से आप यहीं बैठी हो, जाओ आप नहा कर कुछ खा लो तब तक मैं हूँ यहाँ पापा के पास। बहुत मुश्किल से मैने माँ को सम्भाला और जबरदस्ती घर भेजा। सोचा राजीव को बता दूँ कि आज मैं यहीं रूकने का सोच रही हूँ । उनको यहीं बुला लूँगी और सास ससुर का खाना यहीं बना कर भिजवा दूँगी।

हैलो राजीव, हाँ पापा ठीक हैं अभी पर आज यहीं रहना पड़ेगा उन्हे अस्पताल में, तो सोच रही हूँ कि मैं यहीं रूक जाऊँ और आप भी शाम में यही आ जाना तो आपके साथ मैं…. !!

क्या मेरे साथ सुमि… तुमने बिना पूछे ही फैसला कर लिया तो रहो वहीं फिर बताने की क्या जरूरत है। तुम्हे तो परवाह है नही मेरे माँ बाप की, चाहे वो खाएं या ना खाएं| तुम बस अपने माँ बाप का खयाल रखो बस। तुम हो ना वहाँ तो मेरी क्या जरूरत है। तुम अपने माँ बाप का ध्यान रखो और मैं घर जा कर अपने माँ बाप का ध्यान रखूँगा। रखो फोन और जैसे खुद ही अकेली गयी हो वैसे ही खुद ही वापस भी आ जाना। समझी तुम।

हैलो राजीव, पर सुनो तो…!!!

कॉल कट चुका था । मेरी तो समझ में नही आ रहा था कि ये सब था क्या आखिर! राजीव ने एक बार भी पापा को नहीं देखना चाहा। सिर्फ मेरे माँ बाप तुम्हारे माँ बाप करते रह गये। खाना देने वाली थी ना मैं, जिम्मेदारी का एहसास है मुझे, पर राजीव ने तो मेरे ससुराल वालों के लिए मेरा प्यार, मेरा तप झूठा साबित कर मुझे गैर जिम्मेदार ठहरा दिया।

ठीक है अब जो है सो है। मैं माँ के साथ ही रही उस दिन। अगले दिन पापा के डिस्चार्ज होने के बाद भी मैं वापिस ससुराल नहीं गयी।

  • बेटे की पत्नी कभी बेटी नहीं बन सकती

शाम में सास का कॉल आया कि पिता सेवा हो गयी हो तो पति सेवा पर भी ध्यान दो । रोज रोज मैं खाना नहीं बना सकती यहाँ, ये तुम्हारा काम है मेरा नहीं| राजीव को भेज रही हूँ आ जाना साथ।

मन में तो आया कि कह दूँ “मुझे नहीं आना वापस, एक दिन खाना बनाने में ये हालत हो गयी कि इतना सुना दिया” पर संस्कारों की बेड़ियाँ पड़ी थी ना पैर में मेरे। कैसे कुछ कह देती। मैं तो राजीव के परिवार को अपना समझ सब से प्यार जो करने लगी थी, कैसे दे देती मैं उल्टा जवाब।

एक घंटे बाद राजीव आये। अंदर तक नहीं आये और ना ही पापा को देखना चाहा । अर्जेंट काम है ऐसा बहाना बना कर मुझे कार में बिठा बाहर से ही रवाना हो लिये।

इस आधे घंटे के सफर के दौरान मेरी राजीव से कोई बात नहीं हुई पर अपने आप से बहुत सी बातें की मैने।

“लड़की वाले इतना बाध्य क्यों हो जाते हैं कि जरूरत पड़ने पर दामाद को हक से कॉल कर के बुला भी नहीं सकते जैसा कि ससुराल वाले बहू पर हक जमाते रहते हैं। बहू रात दिन सास ससुर की सेवा करे तो सब खुश रहते हैं पर अगर वही बहू दो दिन बेटी का फर्ज निभा माँ बाप के लिए कुछ कर दे तो उलाहना देना शुरू हो जाता है। बहू पर घर परिवार सबकी जिम्मेदारी डाल कर उसे दबाए रखो पर जब बात दामाद की आती है तो सिर्फ आवभगत के सपने ही क्यों! जिस तरह लड़की खुद को भूल कर ससुराल में समर्पित हो जाती है, उसी तरह लड़का अपने ससुराल के दायित्वों का निर्वहन क्यों नहीं करता । लड़की को कहा जाता है कि शादी के बाद पति के माता पिता तुम्हारे माता पिता हुए तो यही बात लड़के से क्यों नहीं कही जाती कि लड़की के माता पिता तुम्हारी जिम्मेदारी है अब ।
किसी की बेटी किसी के घर की एक तरह से काम वाली बन जाती है

ऐसे ही कई खयालात लिए मैं घर पहुँच गयी । जहाँ किचन मेरी राह देख रहा था। डिनर का समय हो रहा था और सब टीवी के सामने मनोरंजन के मजे ले रहे थे। रास्ते भर मुझसे बात ना करने वाले राजीव के मुँह में भी जुबान आ गयी कि “लो माँ ले आया तुम्हारी बहू को, अब आराम करो तुम।” मेरे पैर खुद ही किचन की तरफ बढ़ने लगे तभी अचानक से मैंने अपने कदमों का रूख बदल दिया और सीधे बेडरूम में जा कर बैठ गयी ।

कुछ देर तक कोई हरकत ना हुई तो राजीव किचन में गये वहाँ मुझे ना पा कर रूम में आये और तेज आवाज में कहा- “तुम्हे यहाँ आराम करने लाया हूँ क्या? जाओ जो काम है वो करो । यहाँ आराम ना फरमाओ” ।

अपने संस्कारों को अपने घर ही छोड़ आई थी मैं और निडर हो कर कहा – “कल रात से जगी हूँ, मेरी तबीयत नहीं ठीक लग रही। मुझसे खाना नहीं बनेगा ।”

राजीव ने चिल्लाते हुए कहा – तुम नहीं तो कौन बनायेगा??

क्यों बहुत से किसी की बेटी को अपनी बेटी सा नहीं समझ सकते
वही जिन्होंने कल बनाया था । सक्षम हैं वो । कल बना सकती थी जो आज भी बना सकती हैं। जाकर उनसे कह दो आप कि बना ले खाना और हाँ मैं सिर्फ दो रोटी ही लूँगी। – कह कर मैं चुप चाप आँखे बंद कर के लेट गयी। मुझे नहीं पता था आगे क्या होगा पर मैं तैयार थी पूरी तरह से।

राजीव चुप चाप कमरे के बाहर चले गये । थोड़ी देर बाद किचन से आवाज़ें आने लगी।

कुछ देर रूक गयी मैं किचन में गयी। गरमा गरम रोटियाँ निकल रही थी । मैने थाली लिया तो सास ने ताना दिया – लगा, देखती हूँ कैसे खाना लगाती है बिना सब्ज़ी के। नाटक करवाना है ना! देख अब नाटक होगा।” समझ गयी मैं सासू की चाल पर बिना कुछ कहे हल्की ही मुस्कराहट लिये मैंने दो रोटियाँ निकाली उस पर नमक और घी लगा कर रोल बना कर अपने कमरे में ले कर आ गयी। खा कर पानी पी कर लेट गयी ।

रात के सन्नाटे में घर में हो रहा शोर साफ साफ सुनायी दे रहा था|

ये क्या सूखी रोटी कौन खायेगा?

एक वक्त खाना बनाने में तुम्हे इतनी तकलीफ हो रही है!

हाँ नही बनता मुझसे खाना, उस महारानी को कोई कुछ क्यों नही बोलता? खा कर सो रही है। सबका ठेका ले रखा है क्या मैंने?

माँ कल बना सकती थी तो आज क्यों नहीं! कम से कम आलू ही भून देती उससे ही खा लेते ।

तुम ही खाओ ये सूखी रोटी।

धड़ाम!! (थाली पटकने की आवाज)

एक घबराहट हुई, मन में तो दिल की धड़कनों को सम्भालता हुआ दिमाग बोला – सो जाओ सुमि, सब मतलब परस्त हैं यहाँ। इनके साथ रहना है तो तुम भी मतलब परस्त ही बन जाओ

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Ek Maa Ki Pariksha

story

Maa kya hai

Maa Woh Hai Jo Kadi Dhoop Mein Bhi .

Apne bache ko Thandi or Sheetal Chhaya kaEhsaas Karate hai.


Pyar Jo Ban Gaya Kisi Se Lekar karz

एक बेटा पढ़-लिख कर बहुत बड़ा आदमी बन गया .
पिता के स्वर्गवास के बाद माँ ने
हर तरह का काम करके उसे इस काबिल बना दिया था.

शादी के बाद पत्नी को माँ से शिकायत रहने लगी के
वो उन के स्टेटस मे फिट नहीं है.
लोगों को बताने मे उन्हें संकोच होता है कि
ये अनपढ़ उनकी सास-माँ है…!

बात बढ़ने पर बेटे ने… एक दिन माँ से कहा..

” माँ ”_ मै चाहता हूँ कि मै अब इस काबिल हो गयाहूँ कि कोई
भी क़र्ज़ अदा कर सकता हूँ मै और तुम दोनों सुखी रहें
इसलिए आज तुम मुझ पर किये गए अब तक के सारे
खर्च सूद और व्याज के साथ मिला कर बता…

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Ek Maa Ki Pariksha

Maa kya hai

Maa Woh Hai Jo Kadi Dhoop Mein Bhi .

Apne bache ko Thandi or Sheetal Chhaya kaEhsaas Karate hai.


Pyar Jo Ban Gaya Kisi Se Lekar karz

एक बेटा पढ़-लिख कर बहुत बड़ा आदमी बन गया .
पिता के स्वर्गवास के बाद माँ ने
हर तरह का काम करके उसे इस काबिल बना दिया था.

शादी के बाद पत्नी को माँ से शिकायत रहने लगी के
वो उन के स्टेटस मे फिट नहीं है.
लोगों को बताने मे उन्हें संकोच होता है कि
ये अनपढ़ उनकी सास-माँ है…!

बात बढ़ने पर बेटे ने… एक दिन माँ से कहा..

” माँ ”_ मै चाहता हूँ कि मै अब इस काबिल हो गयाहूँ कि कोई
भी क़र्ज़ अदा कर सकता हूँ मै और तुम दोनों सुखी रहें
इसलिए आज तुम मुझ पर किये गए अब तक के सारे
खर्च सूद और व्याज के साथ मिला कर बता दो .
मै वो अदा कर दूंगा…!

फिर हम अलग-अलग सुखी रहेंगे.
माँ ने सोच कर उत्तर दिया…

“बेटा”_ हिसाब ज़रा लम्बा है…. सोच कर बताना पडेगा मुझे.
थोडा वक्त चाहिए.


Zindagi Ka Karz joke Uttara Na Kabhi

बेटे ने कहा माँ कोई ज़ल्दी नहीं है. दो-चार दिनों मे बता देना.

रात हुई, सब सो गए,
माँ ने एक लोटे मे पानी लिया और बेटे के कमरे मे आई.
बेटा जहाँ सो रहा था उसके एक ओर पानी डाल दिया.
बेटे ने करवट ले ली.
माँ ने दूसरी ओर भी पानी डाल दिया.
बेटे ने जिस ओर भी करवट ली माँ उसी ओर पानी डालती रही.

तब परेशान होकर बेटा उठ कर खीज कर.
बोला कि माँ ये क्या है ?
मेरे पूरे बिस्तर को पानी-पानी क्यूँ कर डाला..?

माँ बोली….

बेटा…. तुने मुझसे पूरी ज़िन्दगी का हिसाब बनानें को कहा था.
मै अभी ये हिसाब लगा रही थी कि मैंने कितनी रातें तेरे बचपन मे
तेरे बिस्तर गीला कर देने से जागते हुए काटीं हैं.
ये तो पहली रात है ओर तू अभी से घबरा गया ..?

मैंने अभी हिसाब तो शुरू भी नहीं किया है जिसे तू अदा कर पाए…!

माँ कि इस बात ने बेटे के ह्रदय को झगझोड़ के रख दिया.
फिर वो रात उसने सोचने मे ही गुज़ार दी. उसे ये अहसास हो गया था कि माँ का
क़र्ज़ आजीवन नहीं उतरा जा सकता.

माँ अगर शीतल छाया है. पिता बरगद है जिसके नीचे बेटा उन्मुक्त भाव से जीवन बिताता है.
माता अगर अपनी संतान के लिए हर दुःख उठाने को तैयार रहती है. तो पिता सारे जीवन उन्हें पीता ही रहता है.

हम तो बस उनके किये गए कार्यों को आगे बढ़ाकर अपने हित मे काम कर रहे हैं.
आखिर हमें भी तो अपने बच्चों से वही चाहिए ना ……..!

Sacha Pyar Har Kise Ko Nahi Milta

एक_रियल_स्टोरी_लव

एक लड़का एक लड़की से बहुत प्यार करता था ……कभी मिला नहीं था उससे …..पर हर वक्त उसकी यादे उसकी तस्वीर को देखना उसकी बातो को सोचकर खुस रहना ….जब उसका कॉल आये तो जैसे ढेरो सारि खुसिया मिल गयी हो उसे …..उस लड़की से लड़का काफी दूर रहता था जो कभी मिले नहीं एक दूसरे से ….पर लड़की भी उसको बहुत ज्यादा प्यार करती थी हमेसा उसके लिए ही सोचना ……काफी वक्त हो गया उनकी प्यार की कहानी को चलते हुए …..पर जिन्होंने एक दूसरे को देखा भी नहीं पर विश्वास उनके प्यार से भी ज्यादा गहरा था ….
कभी एक दूसरे पर शक नहीं किया करते थे .किसी भी बात को लेकर …एक. दिन दोनों ने मिलने का फैसला किया ……और लड़का 24 घंटे का सफर करके दूसरे दिन वहा पहुंच गया ….लड़की भी पहुंच गयी ..और उन्होंने एक होटल रूम बुक किया …..लड़के का जन्म दिन था उस दिन …..लड़की ने लड़के का जन्म दिन मनाया …..और लड़के को विश किया केक काटा और दोनों एक दूसरे के गले लग गए …..दोनों रोने लगे…खुसी के मारे. जो बहुत दिनों बाद मिले थे .दोनो… ने बहुत बाते की एक दूसरे से …….उस वक्त उनकी खुसियो का कोई ठिकाना हीं था …..
और लड़का जब वहा से जाने लगा अपने घर तो लड़की के मन में एक ही सवाल बार बार आरहा था ….और जब नहीं रहा गया तो लड़के से पूछ लिया ….
लड़की…बाबू एक बात पुछु …..
लड़का ….हा बोलो क्या हुआ ..
लड़की….आप इतनी दूर से मुझे मिलने आये इतना पैसा खर्च किया पर आप ने मेरे साथ वो सब नहीं किया जो सब लड़के लड़की करते हैं …जबकि मैं आप को रोकी भी नहीं फिर भी
.
लड़का..उसको अपने गले लगाकर. बोला बाबू ….अगर मुझे जिस्म चाहिए होता तो पेसो में बहुत मिल जाते ह ….मैं यहां क्यों आता जिस्म के खातिर ….और. मैं अभी तेरे साथ असा कुछ नहीं कर सकता अगर हम कभी दूर हुए तो आप की इज्जत को आंच नहीं आने दुगा ..और आप की इज्जत तो सलामत रहेगी .और आप को उस वक्त यही लगेगा मेरे साथ कुछ गलत नहीं हुआ है …..फिर आप आगे बढ़ सकोगी ….पर प्यार तो दिल से होता है आप को सामने देखकर बहुत अच्छा लगा …..और मेरी बाबू बहुत प्यारी है मैं आप को ऐसे ही देखकर खुश हूँ और य सब तो हमारी सादी के बाद भी होता रहेगा …..अभी तो हम आप. के साथ कुछ नहीं होने देंगे …..म इस दिल को प्यार करता हु जिस्म को नहीं बाबू ….

लड़की …लड़के के जोर से चिपक गयी और आखो में आँसू आगये मैं बहुत खुश नसीब हूँ मुझे मेरा सच्चा प्यार करने वाला मिल गया ….म कभी दूर नहीं जाऊगी आप से ..i love you यार ….मुझे कभी छोड़कर मत जाना …..मर जाऊगी आप के बिना ……
.
लड़का…खुश नसीब तो मैं आप से ज्यादा हूँ जो मुझे मेरी जान मिली इतनी प्यारी …..जो मुझे बहुत प्यार करती है …..और. मैं छोड़कर जाना दूर ये बात सोचता भी नहीं इस बारे में …love you to यार …..

और दोनों एक दूसरे के गले लग गए …..

सच है यार जिस्म का व्यापार तो बाजारो में होता है …..
दिल. से मोहब्त हो जाय तो हमेशा सच्चा प्यार होता है ….

#अगर_जिस्म_पर_ही_मरना_हो_तो_प्यार_मत_करना

…..#कहीं_किराय_का_जिस्म_लेकर_चले_जाना….

#पर_सच्चा_प्यार_का_नाम_लेकर ….
#किसी_की_जिंदगी_के_साथ_खिलवाड़_मत_करना …..

Pyar Main Aisa Bhi Hota Hai

एक नई कहानी लेकर आई हूँ और मुझे पूरा विश्वास है की ये कहानी आपके दिल को छू जायगी


Pyar Main Aisa Bhi Hota

1 लाडका 1 लडकी
से बहूत
प्यार करता
था।
लेकिन उसकी 1 बहूत बुरी
आदत थी
की वह बुरा शब्द का बहूत
उपयोग करता था
लड़की भी उसे बहूत
पसन्द करती थी
लेकिन
उसके घर वाले उस लड़के को पसंद नहीं करते थे
क्योकि उसे बात करने की तमीज नहीं थी ,
एक बार उसने लड़की को कहा
I LOVE YOU …..
लड़की :- I LOVE YOU TOO
लेकिन
तभी उस लड़की के पापा का फ़ोन आया
पापा – कहा हो ,उसी लड़के की पास होगी
कितनी बार बोला है की उस लड़के से दुर रहा करो
यह कहकर उसके पापा ने फ़ोन काट दिया ।
लडका समझ गया और वहां से चला गया ,
लड़के की local studies पूरी हो चुकी थी
इसलिये उसे आगे की पढाई करने के लिए
शहर जाना था


Life Main Hone Laga Sab Thik

अगले दिन वह उस लड़की के पास गया
और उससे बोला -मुझे नहीं पता की
तुम्हारे पापा मुझे क्यों नहीं पसंद करते
लेकिन मैं अब सुधर जाऊँगा
लड़की खुश हुई और उसने लड़के को
अपने पापा से बात करने के लिए
बोला
लडका लड़की के पापा के पास गया
और उसने वादा किया की वो अब एक अच्छा
लडका बन जायेगा
लड़की की घर वालो की सहमती से
लड़के के शहर जाने से पहले
उस लडकी से उसकी सगाई
कर दी ,

दोनो ने एक दुसरे को रींग पहनाई
वह लडका फिर शहर चला गया
लेकिन वह प्रतिदिन लड़की को
कॉल करता ,massege करता और प्यार
भरि बाते करता
लेकिन एक दिन वह लड़की अपने मम्मी पापा
के साथ घर वापस आ रही थी
तभी रास्ते में एक कार ने उन
तीनो को टक्कर मार दी
थोडी देर बाद लड़की ने देखा उसके
मम्मी पापा दर्द से चिल्ला रहे थे
वह कुछ करना चाहती थी लेकिन
उसे भी बहुत चोट लगी थी
तीनो को होस्पिटल में भार्ती काराया गया
वहां डॉक्टर ने बताया की accident में लड़की की
आवाज चली गयी है और वो
अब कभी भी बोल नहीं सकती ,
लड़की को इस बात से बड़ा
सादमा लगा ,
उसे घर लाया गया है
लड़के के कॉल पर कॉल और
Massege पे massege
आ रहे थे


Door Hokar Bhi The Pass

लेकिन लड़की ने ना ही कॉल का ना ही sms
का कोई रिप्लाई नहीं दिया ,

वो उसे दुखी नहीं करना चाहती थी
उसने उस लड़के को पत्र लिखा कि
वो उसे भूल जाये ,अब
वह उससे प्यार नहीं करती है ,
और उसने सगाई वाली ring भी
साथ में वापस भेज दी ,
अब वो बहुत दुखी रहने लगी
और रात दिन रोने लगी ,
उसके घर वालो ने सोचा की
अगर हम लोग कही दुसरे जगह चले जाये
तो यह उसे भूल जायेगी ,
और यह सोच कर वे उस घर को छोडकर
दुसरे जगह रहने लगे
और लड़की वहां पर
इसारो की भाषा सीख गयी
और अपने पापा से रोज़ कहती की
अब उसने उसे भूला दिया है
कुछ दिनो बाद उस लड़के का एक
दोस्त उसके घर आया और
उस लड़की से बोला की वो तुमसे मिलना
चाहता है ,
लड़की ने एक खत पे लिखकर
उसके दोस्त को कहा
की उस लड़के को कभी भी मत बाताना की मैं
कहा हूँ और मैं बोल नहीं सकती ,
यह सून कर वह लडका वहां से चला गया
2-3 साल बाद उस लड़के का वही दोस्त
अपनी हाथ में एक card लेकर उस लड़की के
पास आया और उस लड़की को card देते हुए
बोला की “वो “अब शादी कर रहा है
और उस लड़की ने दुखी मन से उस card को
खोला और उसने देखा की उसमें दुल्हन की जगह
उसका खुद का नाम लिखा था ,
और फिर उसने उपर देखा तो
उस लड़के के पिछे उसका (lover) भी
खडा था ,
और उसके lover ने उसे इसारो में समझाया की
उसने इन 2-3 सालो में केवल इशारो की
भाषा सीखी है …..
इसलिये आने में लेट हो गया
अब तुम जैसे बोलोगी मैं
वैसे ही बोलूँगा ,
यह सुनकर उस लड़की
की आँखो में आँसु आ गया
और उसने लड़के को गले लगा लिया


यह काहानी आपको कैसी लगी comment box में आपनी राय दे zindagi zeelo

Bhangarh History

story

Bhangarh Fort History  :भानगढ़ का किला (Bhangadh Fort)। जो कि बोलचाल में “भूतो का भानगढ़” नाम से ज्यादा प्रसिद्ध है।


भानगढ़ का खंडहर हो चूका बाज़ार

भानगढ़(Bhangarh) कि कहानी बड़ी ही रोचक है 16 वि शताब्दी में भानगढ़ बसता है।  300 सालो तक  भानगढ़ खूब फलता फूलता है।  फिर यहाँ कि एक सुन्दर राजकुमारी  पर काले जादू में महारथ तांत्रिक सिंधु सेवड़ा आसक्त हो जाता है। वो राजकुमारी  को वश में करने लिए काला जादू करता है पर खुद ही उसका शिकार हो कर मर जाता है पर मरने से पहले भानगढ़ को बर्बादी का श्राप दे जाता है और संयोग से उसके एक महीने बाद ही पड़ौसी राज्य अजबगढ़ से लड़ाई में राजकुमारी सहित सारे भानगढ़ वासी मारे जाते है और भानगढ़  वीरान हो जाता है। तब से वीरान हुआ भानगढ आज तक वीरान है और कहते है कि उस लड़ाई में मारे गए लोगो के भूत आज भी रात को भानगढ़ के किले में भटकते…

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Bhangarh History

Bhangarh Fort History  :भानगढ़ का किला (Bhangadh Fort)। जो कि बोलचाल में “भूतो का भानगढ़” नाम से ज्यादा प्रसिद्ध है।


भानगढ़ का खंडहर हो चूका बाज़ार

भानगढ़(Bhangarh) कि कहानी बड़ी ही रोचक है 16 वि शताब्दी में भानगढ़ बसता है।  300 सालो तक  भानगढ़ खूब फलता फूलता है।  फिर यहाँ कि एक सुन्दर राजकुमारी  पर काले जादू में महारथ तांत्रिक सिंधु सेवड़ा आसक्त हो जाता है। वो राजकुमारी  को वश में करने लिए काला जादू करता है पर खुद ही उसका शिकार हो कर मर जाता है पर मरने से पहले भानगढ़ को बर्बादी का श्राप दे जाता है और संयोग से उसके एक महीने बाद ही पड़ौसी राज्य अजबगढ़ से लड़ाई में राजकुमारी सहित सारे भानगढ़ वासी मारे जाते है और भानगढ़  वीरान हो जाता है। तब से वीरान हुआ भानगढ आज तक वीरान है और कहते है कि उस लड़ाई में मारे गए लोगो के भूत आज भी रात को भानगढ़ के किले में भटकते है।क्योकि तांत्रिक के श्राप के कारण उन सब कि मुक्ति नहीं हो पाई थी।  तो यह है भानगढ़ कि कहानी जो कि लगती फ़िल्मी है पर है असली। तो आइये अब हम आपको भानगढ़ के उत्थान से पतन कि यह कहानी विस्तार से बताते है।


भानगढ़ – एक परिचय (Bhangarh – An Introduction) :-

भानगढ़ का किला, राजस्थान के अलवर जिले में स्तिथ है।  इस किले सी कुछ किलोमीटर कि दुरी पर विशव प्रसिद्ध सरिस्का राष्ट्रीय उधान (Sariska National Park) है।  भानगढ़ तीन तरफ़ पहाड़ियों से सुरक्षित है। सामरिक दृष्टि से किसी भी राज्य के संचालन के यह उपयुक्त स्थान है। सुरक्षा की दृष्टि से इसे भागों में बांटा गया है। सबसे पहले एक बड़ी प्राचीर है जिससे दोनो तरफ़ की पहाड़ियों को जोड़ा गया है। इस प्राचीर के मुख्य द्वार पर हनुमान जी विराजमान हैं। इसके पश्चात बाजार प्रारंभ होता है, बाजार की समाप्ति के बाद राजमहल के परिसर के विभाजन के लिए त्रिपोलिया द्वार बना हुआ है। इसके पश्चात राज महल स्थित है। इस किले में कई मंदिर भी है जिसमे भगवान सोमेश्वर, गोपीनाथ, मंगला देवी और केशव राय के मंदिर प्रमुख मंदिर हैं। इन मंदिरों की दीवारों और खम्भों पर की गई नक़्क़ाशी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह समूचा क़िला कितना ख़ूबसूरत और भव्य रहा होगा। सोमेश्वर मंदिर के बगल में एक बाबड़ी  है जिसमें अब भी आसपास के गांवों के लोग नहाया करते हैं ।


 

भानगढ़ का इतिहास (History Of Bhangarh) :-

भानगढ़ क़िले को आमेर के राजा भगवंत दास ने 1573  में बनवाया था। भानगढ़ के बसने के बाद लगभग 300 वर्षों तक यह आबाद रहा।  मुग़ल शहंशाह अकबर के नवरत्नों में शामिल और भगवंत दास के छोटे बेटे व अम्बर(आमेर ) के महान मुगल सेनापति, मानसिंह के छोटे भाई राजा माधो सिंह ने बाद में (1613) इसे अपनी रिहाइश बना लिया।  माधौसिंह के बाद उसका पुत्र छत्र सिंह गद्दी पर बैठा।  विक्रम संवत 1722 में इसी वंश के हरिसिंह ने गद्दी संभाली।इसके साथ ही भानगढ की चमक कम होने लगी। छत्र सिंह के बेटे अजब सिह ने समीप ही अजबगढ़ बनवाया और वहीं रहने लगा। यह समय औरंगजेब के शासन का था। औरंगजेब कट्टर पंथी मुसलमान था। उसने अपने बाप को नहीं छोड़ा तो इन्हे कहाँ छोड़ता। उसके दबाव में आकर हरिसिंह के दो बेटे मुसलमान हो गए, जिन्हें मोहम्मद कुलीज एवं मोहम्मद दहलीज के नाम से जाना गया। इन दोनों भाईयों के मुसलमान बनने एवं औरंगजेब की शासन पर पकड़ ढीली होने पर जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह ने इन्हे मारकर भानगढ़ पर कब्जा कर लिया तथा माधो सिंह के वंशजों को गद्दी दे दी।

भानगढ़ किले कि ऊपरी मंजिले जो कि बिल्कुल खंडहर हो चुकी हैं


राजकुमारी रत्नावती और तांत्रिक सिंधु सेवड़ा (Rajkumari Ratnawati aur Tantarik Sindhu Devada) :-

कहते है कि भानगढ़ कि राजकुमारी रत्नावती बेहद खुबसुरत थी। उस समय उनके रूप की चर्चा पूरे राज्य में थी और देश के कोने कोने  के राजकुमार उनसे विवाह करने के इच्छु‍क थे। उस समय उनकी उम्र महज 18 वर्ष ही थी और उनका यौवन उनके रूप में और निखार ला चुका था। उस समय कई राज्योi से उनके लिए विवाह के प्रस्ता व आ रहे थे। उसी दौरान वो एक बार किले से अपनी सखियों के साथ बाजार में निकती थीं। राजकुमारी रत्नाथवती एक इत्र की दुकान पर पहुंची और वो इत्रों को हाथों में लेकर उसकी खुशबू ले रही थी। उसी समय उस दुकान से कुछ ही दूरी  सिंधु सेवड़ा नाम का व्यnक्ति खड़ा होकर उन्हेा बहुत ही गौर से देख रहा था।

सिंधु सेवड़ा उसी राज्य; में रहता था और वो काले जादू का महारथी था। ऐसा बताया जाता है कि वो राजकुमारी के रूप का दिवाना था और उनसे प्रगाण प्रेम करता था। वो किसी भी तरह राजकुमारी को हासिल करना चाहता था। इसलिए उसने उस दुकान के पास आकर एक इत्र के बोतल जिसे रानी पसंद कर रही थी उसने उस बोतल पर काला जादू कर दिया जो राजकुमारी के वशीकरण के लिए किया था। लेकिन एक विश्वशनीय व्यक्ति ने राजकुमारी को इस राज के बारे में बता दिया।

पहाड़ी कि चोटी पर तांत्रिक सिंधु सेवड़ा कि छतरी (जहा वो तांत्रिक साधना करता था)

राजकुमारी रत्नाकवती ने उस इत्र के बोतल को उठाया, लेकिन उसे वही पास के एक पत्थकर पर पटक दिया। पत्थlर पर पटकते ही वो बोतल टूट गया और सारा इत्र उस पत्‍थर पर बिखर गया। इसके बाद से ही वो पत्थ र फिसलते हुए उस तांत्रिक सिंधु सेवड़ा के पीछे चल पड़ा और तांत्रिक को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी। मरने से पहले तांत्रिक ने श्राप दिया कि इस किले में रहने वालें सभी लोग जल्दो ही मर जायेंगे और वो दोबारा जन्मश नहीं ले सकेंगे और ताउम्र उनकी आत्मांएं इस किले में भटकती रहेंगी।

उस तांत्रिक के मौत के कुछ दिनों के बाद ही भानगढ़  और अजबगढ़ के बीच युद्ध हुआ जिसमें किले में रहने वाले सारे लोग मारे गये। यहां तक की राजकुमारी रत्नाचवती भी उस शाप से नहीं बच सकी और उनकी भी मौत हो गयी। एक ही किले में एक साथ
इतने बड़े कत्लेउआम के बाद वहां मौत की चींखें गूंज गयी और आज भी उस किले में उनकी रू‍हें घुमती हैं।


किलें में सूर्यास्ता के बाद प्रवेश निषेध (Entrance Prohibited after Sunset) :-

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा खुदाई से इस बात के पर्याप्त सबूत मिले हैं कि यह शहर एक प्राचीन ऐतिहासिक स्थल है। फिलहाल इस किले की देख रेख भारत सरकार द्वारा की जाती है। किले के चारों तरफ आर्कियोंलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) की टीम मौजूद रहती हैं। एएसआई ने सख्तक हिदायत दे रखी  है कि सूर्यास्ता के बाद इस इलाके में किसी भी व्यतक्ति के रूकने के लिए मनाही है।

भारतीय पुरातत्व के द्वारा इस खंडहर को संरक्षित कर दिया गया है। गौर करने वाली बात है जहाँ पुरात्तव विभाग ने हर संरक्षित क्षेत्र में अपने ऑफिस बनवाये है वहीँ इस किले के संरक्षण के लिए पुरातत्व विभाग ने अपना ऑफिस भानगढ़ से दूर बनाया है।


भानगढ़ किले के मंदिर –

जैसा कि हमने आपको बताया कि इस किले में कई मंदिर भी है जिसमे भगवान सोमेश्वर, गोपीनाथ, मंगला देवी और केशव राय के मंदिर प्रमुख मंदिर हैं।

सोमेश्वर महादेव मंदिर

इन मंदिरो कि एक यह विशेषता है कि जहाँ किले सहित पूरा भानगढ़ खंडहर में तब्दील हो चूका है वही भानगढ़ के सारे के सारे मंदिर सही है अलबत्ता अधिकतर मंदिरो से मुर्तिया गायब है। सोमेश्वर महादेव मंदिर में जरूर शिवलिंग है।

सोमेश्वर महादेव मंदिर के गर्भ गृह में स्तिथ शिवलिंग

दूसरी बात भानगढ़ के सोमेशवर महादेव मंदिर में सिंधु सेवड़ा तांत्रिक के वंशज ही पूजा पाठ कर रहे है। ऐसा हमे 2009 में हमारी भानगढ़ यात्रा के दौरान उस मंदिर के पुजारी ने बताया था। जब हमने उनसे भूतों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि यहाँ भूत है यह बात सही है पर वो भूत किले के अंदर केवल खंडहर हो चुके महल में ही रहते है महल से निचे नहीं आते है क्योकि महल की सीढ़ियों के बिलकुल पास भोमिया जी का स्थान है जो उन्हें महल से बाहर नहीं आने देते है। उन्होंने यह भी कहा कि रात के समय आप किला परिसर में रह सकते है कोई दिक्क्त नहीं है पर महल के अंदर नहीं जाना चाहिए।